मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना: महाराष्ट्र सरकार की सुपरहिट स्कीम अब जांच के घेरे में
मुंबई – महाराष्ट्र सरकार की फ्लैगशिप योजना मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी विधानसभा चुनाव में महायुति सरकार को सत्ता में वापस लाने का क्रेडिट पाने वाली इस योजना में अब बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है।
क्या है लाडकी बहीण योजना?
महाराष्ट्र सरकार ने 17 अगस्त 2024 को इस योजना को लॉन्च किया था। इसके तहत राज्य की 21 से 65 साल की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक मदद दी जाती है। सालाना खर्च ₹46,000 करोड़ बताया गया था।
ताजा अपडेट – 92 लाख नाम कटे
पिछले एक महीने में सरकार ने बड़े verification drive के बाद बड़ा एक्शन लिया है।
सरकार ने e-KYC वेरिफिकेशन के बाद लगभग 81 लाख लाभार्थियों को अपात्र पाकर योजना से बाहर कर दिया था। अब ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह संख्या बढ़कर 92 लाख से ज्यादा हो गई है, जो कुल लाभार्थियों का लगभग 38% है।
सबसे ज्यादा कटौती बीड जिले में हुई है। सरकार ने पहले 26 लाख संदिग्ध लाभार्थियों की जांच शुरू की थी।
गड़बड़ी क्या मिली?
जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए:
- पुरुषों के नाम पर आवेदन
- सरकारी कर्मचारी भी लाभ ले रहे थे
- उम्र 65 साल से ज्यादा होने पर भी फायदा
- e-KYC न करने वाले अपात्र खाते
इसी वजह से विपक्ष ने सरकार पर योजना का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मांग की है कि फर्जी लाभ लेने वाले पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
CAG की रिपोर्ट से और टेंशन
कैग (CAG) ने भी ₹3,541 करोड़ के अतिरिक्त खर्च को बिना औचित्य के बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लाभार्थी वेरिफिकेशन में सिस्टमैटिक गड़बड़ी हुई है।
अब क्या होगा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा है कि 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलता रहेगा। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा है कि योजना बिना रुकावट जारी रहेगी।
सरकार ने e-KYC की डेडलाइन बढ़ा दी है ताकि तकनीकी दिक्कत झेल रही महिलाओं को राहत मिल सके।
जून महीने की ₹1,500 की किस्त का इंतजार कर रही लगभग 2.5 करोड़ महिलाओं में असमंजस है, लेकिन सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पात्र महिलाओं को पैसा मिलता रहेगा।
निष्कर्ष:
लाडकी बहीण योजना महाराष्ट्र की सबसे बड़ी महिला सशक्तिकरण योजना है, लेकिन 69 लाख से लेकर 92 लाख तक लाभार्थियों का नाम कटना यह दिखाता है कि लॉन्च के समय वेरिफिकेशन में बड़ी चूक हुई थी। अब सरकार सफाई अभियान में जुटी है।









