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“भीमराव की बेटी हूं, मैं तो जयभीम वाली हूं” प्रसिद्ध गायिका “किरण पाटणकर” का 5 फरवरी, 2024 को, उनके बेजानबाग स्थित घर पर निधन हो गया, ।

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अंबेडकरी सांस्कृतिक आंदोलन की दुनिया में जब भी भीम गीतों और धम्मगीतों का उल्लेख होगा, तब प्रसिद्ध गायिका किरण पाटणकर का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। अपनी मधुर, प्रभावशाली और ओजस्वी आवाज़ से उन्होंने लाखों लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनका लोकप्रिय गीत “भीमराव की बेटी हूं, मैं तो जयभीम वाली हूं” आज भी अंबेडकरी समाज में उत्साह, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।

5 फ़रवरी 2024 को लंबी बीमारी के बाद नागपुर के बेजानबाग स्थित उनके निवास पर उनका निधन हो गया। उनके निधन से न केवल संगीत जगत, बल्कि पूरे अंबेडकरी आंदोलन ने अपनी एक सशक्त सांस्कृतिक आवाज़ खो दी। वे लगभग 62 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार नागपुर के वैशाली घाट पर किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में उनके प्रशंसकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

उनके पीछे भाई-बहन तथा परिवार के अन्य सदस्य हैं। उनके निधन का समाचार पूरे महाराष्ट्र और देशभर के अंबेडकरी समाज के लिए अत्यंत दुःखद रहा।

किरण पाटणकर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे अंबेडकरी आंदोलन की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी थीं। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के विचार, बुद्ध धम्म का संदेश, सामाजिक समानता और आत्मसम्मान की भावना को जन-जन तक पहुँचाया।

उनकी गायकी में केवल संगीत नहीं, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक परिवर्तन की पुकार सुनाई देती थी। यही कारण था कि उनके गीत गाँवों से लेकर बड़े शहरों तक, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस, आंबेडकर जयंती, महापरिनिर्वाण दिवस और सामाजिक कार्यक्रमों में पूरे उत्साह के साथ गाए और सुने जाते थे।

उनके निधन पर अनेक सामाजिक संगठनों, कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और अंबेडकरी आंदोलन से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। कई लोगों ने कहा कि उनके जाने से आंदोलन ने अपनी एक प्रेरणादायक आवाज़ खो दी है।

किरण पाटणकर का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले के बडनेरा में हुआ था। बचपन से ही उनका वातावरण साहित्य, संगीत और सामाजिक चेतना से जुड़ा हुआ था। कुछ समय बाद उनका परिवार नागपुर में आकर बस गया, जहाँ से उनकी सांस्कृतिक यात्रा ने नई दिशा प्राप्त की।

उनके पिता नागोराव पाटणकर एक प्रसिद्ध कवि थे। वे सामाजिक विषयों और बहुजन चेतना पर आधारित रचनाओं के लिए जाने जाते थे। साहित्य और संगीत की यही विरासत किरण पाटणकर को भी मिली।

उनके भाई प्रकाशनाथ पाटणकर भी अंबेडकरी समाज के प्रसिद्ध गायक हैं। इस प्रकार पूरा परिवार संगीत और सामाजिक जागरूकता से जुड़ा रहा।

किरण पाटणकर को बचपन से ही गायन का गहरा शौक था। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर बहुत कम समय में अलग पहचान बना ली। उनकी आवाज़ में लोकसंगीत की आत्मीयता, कव्वाली की ऊर्जा और भीम गीतों की प्रेरणा का अद्भुत संगम दिखाई देता था।

वे प्रसिद्ध गायकों आनंद शिंदे और जानी बाबू के साथ भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कव्वाली मुकाबलों में अपनी प्रस्तुति देती थीं। इन मंचों ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई।

किरण पाटणकर ने अपने जीवन का अधिकांश समय बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर, भगवान बुद्ध, धम्मक्रांति और सामाजिक न्याय पर आधारित 100 से अधिक गीतों को अपनी आवाज़ दी।

उनके भीम गीतों के ऑडियो कैसेट और बाद में सीडी पूरे महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों में अत्यंत लोकप्रिय हुए। उनके गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि सामाजिक जागरूकता और आत्मसम्मान का संदेश भी देते थे।

आंबेडकर जयंती, धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस, बुद्ध पूर्णिमा और महापरिनिर्वाण दिवस जैसे आयोजनों में उनकी प्रस्तुति का विशेष इंतज़ार किया जाता था। जब वे मंच पर “भीमराव की बेटी हूं, मैं तो जयभीम वाली हूं” जैसे गीत प्रस्तुत करती थीं, तो पूरा वातावरण जोश, गर्व और भावनाओं से भर जाता था।

उनकी आवाज़ ने हजारों युवाओं को अंबेडकरी विचारधारा, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि उन्हें अंबेडकरी सांस्कृतिक आंदोलन की सबसे लोकप्रिय महिला गायिकाओं में गिना जाता है।

किरण पाटणकर केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी सक्रिय थीं। उन्होंने जनसेवा के उद्देश्य से राजनीति में भी भागीदारी निभाई।

वे अपने क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से नगरसेविका चुनी गई थीं। जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को उठाने और सामाजिक विकास के कार्यों में योगदान दिया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में रामटेक संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। बाद में 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के उम्मीदवार के रूप में भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई।

हालाँकि चुनावी सफलता उन्हें नहीं मिली, लेकिन उन्होंने सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी रखा।

किरण पाटणकर ने यह सिद्ध किया कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम भी हो सकता है। उनके गीतों ने हजारों लोगों को शिक्षा, आत्मसम्मान, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया।

उन्होंने अपने पूरे जीवन में मंच, संगीत और समाज सेवा को एक साथ जोड़ा। उनके गीत आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उनकी गायकी ने अंबेडकरी आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की और भीम गीतों को घर-घर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

5 फ़रवरी 2024 को किरण पाटणकर का निधन अंबेडकरी सांस्कृतिक आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। उन्होंने अपने मधुर स्वर, प्रेरणादायक गीतों और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से लाखों लोगों के हृदय में स्थायी स्थान बनाया।

उनकी पहचान केवल एक लोकप्रिय गायिका के रूप में नहीं, बल्कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों की सांस्कृतिक दूत के रूप में रहेगी। उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा, समानता, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।

vanchit aaghadi kiran patankar image of 2019
vanchit aaghadi kiran patankar image of 2019

video source : RR vlog




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